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यूपीएससी की अनोखी कहानियां : प्रियंका के गांव में नहीं लैंडलाइन फोन ,पिता को 4 दिन बाद मिली खबर, फिरोज ने कॉन्स्टेबल की ड्‌यूटी के साथ की पढ़ाई…

उत्तराखंड के चमोली जिले में आने वाला छोटा सा गांव है रामपुर। यहां 80-90 परिवार रहते हैं। गांव में न पक्की सड़कें हैं और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। मोबाइल तो दूर की बात, यहां लैंडलाइन फोन तक नहीं है। पांचवी कक्षा के बाद बच्चों को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है, क्योंकि रामपुर में पांचवी तक ही स्कूल है। यदि किसी की तबियत खराब हो जाए तो करीब 100 किमी दूर देवाल आना पड़ता है, तब इलाज मिल पाता है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में आने वाला छोटा सा गांव है रामपुर। यहां 80-90 परिवार रहते हैं। गांव में न पक्की सड़कें हैं और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। मोबाइल तो दूर की बात, यहां लैंडलाइन फोन तक नहीं है। पांचवी कक्षा के बाद बच्चों को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है, क्योंकि रामपुर में पांचवी तक ही स्कूल है। यदि किसी की तबियत खराब हो जाए तो करीब 100 किमी दूर देवाल आना पड़ता है, तब इलाज मिल पाता है।

जब हमारी प्रियंका से बात हो रही थी तो वह अपनी दो बहन और एक भाई के साथ गाड़ी से देहरादून से चमोली के लिए निकली थीं। बोलीं, पांचवी तक मैं रामपुर में ही पढ़ी। फिर हर रोज 3 किमी दूर टोरटी गांव जाया करती थी क्योंकि वहां छठवीं से दसवीं तक का स्कूल था। दसवीं के बाद गोपेश्वर आ गए। यह थोड़ी बड़ी जगह है, जहां स्कूल-कॉलेज सब हैं। फिर यहां से ग्रेजुएशन किया।

जब फर्स्ट ईयर में थी, तब कॉलेज में एक फंक्शन में डीएम आए थे। उन्होंने हम लोगों को कलेक्टर की पोस्ट की अहमियत बताई और कहा कि आप भी प्रयास करें तो सक्सेस पा सकते हैं।

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