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यूएस : रूसी हैकरों ने चुराया मतदाताओं का डेटा, जांच एजेंसियों ने अपने ही नागरिकों से बात छिपाई..

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हैकरों के दखल की चर्चा के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ। दावा किया गया है कि 2016 में फ्लोरिडा राज्य की दो काउंटी के मतदाताओं का डाटा रूसी हैकरों ने चुरा लिया था। इस बारे में फ्लोरिडा के गवर्नर से लेकर कांग्रेस (संसद) के डेलिगेशन तक सबको पता था, लेकिन जांच एजेंसी एफबीआई ने प्रभावित मतदाताओं को इसकी जानकारी नहीं दी। 

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने दो अधिकारियों के हवाले से बताया है कि रूसी मिलिट्री की जासूसी एजेंसी जीआरयू ने जिन दो काउंटी के मतदाताओं का डेटा हैक किया था, उसमें वॉशिंगटन काउंटी के 25 हजार नागरिकों की जानकारी शामिल थी। अमेरिकी सांसदों ने उन्हें यह बताने की कोशिश भी की, लेकिन एफबीआई ने खतरे का पता चलने के बाद भी इस जानकारी को गुप्त ही रखा गया। 

मूलर रिपोर्ट के बाद गरमाया मुद्दा

दो काउंटी में मतदाताओं के डेटा की हैकिंग की बात हाल ही में पेश हुई मूलर रिपोर्ट में भी की गई थी। इसके बाद ही फ्लोरिडा असेंबली में एफबीआई की चूक को लेकर बहस शुरू हुई है। 

एफबीआई की चूक की वजह से पेंटागन ने भी नहीं बरती सतर्कता
अमेरिकी सांसद मैट गेट्ज के मुताबिक, एफबीआई और गृह विभाग नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे। उन्होंने यह भी बताया कि एफबीआई ने रूसी साइबर हमलों की जानकारी मिलने के बावजूद इसकी जानकारी सुरक्षा विभाग पेंटागन को नहीं दी। इसके चलते पेंटागन ने साइबर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट नहीं किया था। 

एफबीआई का दावा- मतदाताओं के डाटा से नहीं हुई छेड़छाड़
आमतौर पर अमेरिका में वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम मतदाता लिस्ट से अलग होते हैं। हालांकि, हैकर सिर्फ रजिस्ट्रेशन सिस्टम में घुसकर भी किसी वोटर को जोड़ या हटा सकते थे। इसके बावजूद एफबीआई का दावा है कि जीआरयू की तरफ से किसी डेटा से छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई। 

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